पंडरिया:- कारखाना में इस बार गन्ना शोध केंद्र से गन्ने की नयी प्रजातियो के 32 लाख गन्ना पौधे का वितरण किसानों को किया गया | गन्ने की CO-J85 वैरायटी के उत्पादन के निराशा से विभाग ने इसके विकल्प के रूप में दूसरी प्रजातियों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है, नयी वैरायटी का गन्ना विभाग लगातार बढ़ा रहा है। इनमें CO-86032, PDN 13007 & 15012 तथा SNK 13374, शामिल है। तमाम शोध के आधार पर यह सभी ऐसी प्रजातिया है जो हर तरह से COJ85 के गन्ना से बेहतर है |


1000 क्विंटल से अधिक होगा उत्पादन
गन्ने की नई किस्मों से एक हेक्टेयर गन्ने की फसल से 1000 से 1200 क्विंटल तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है | यह किस्म चीनी मिलों के लिहाज से भी काफी अच्छी है, तथा इसमें चीनी पर रिकवरी भी है |
Co 86032( नयना) का गन्ना मोटा, जमाव बेहतर और ज्यादा कल्ले करने की क्षमता रखती है, इस किस्म से किसानों को पेड़ी की फसल भी अच्छी मिलेगी गन्ने की यह किस्म बुवाई के लिए बेहद ही अच्छी है l
किसान कैसे करें सहीं गन्ने का चुनाव ?
बीज की मात्रा को लेकर भी किसान भाइयों को सही जानकारी होना जरूरी है अगर वे एक आंख वाला बीज लेते हैं, तो करीब 20 क्विंटल प्रति एकड़ बीज की जरूरत पड़ती है. वहीं अगर दो आंख वाला गन्ना बोया जाता है, तो करीब 30 क्विंटल प्रति एकड़ बीज लग जाता है |
विशेषज्ञों का कहना है कि गन्ना की खेती में सफलता का सबसे बडा आधार सही बीज का चयन है, यदि बीज चयन में गलती हो जाए तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिकांश किसान गन्ना बोते समय बीज चयन को हल्के में ले लेते हैं जबकि यही चरण पूरी फसल की दिशा तय करता है, गलत या रोगग्रस्त बीज की बुआई से अंकुरण कमजोर होता है जिससे पौधों की संख्या घटती है और अंत में उत्पादन पर सीधा असर पडता है ऐसे में किसानों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि गन्ने का कौन सा भाग बीज के लिए सबसे उपयुक्त रहता है गन्ना बीज का चयन करते समय सबसे पहले उसकी सेहत पर ध्यान देना चाहिए, जिस गन्ने पर लाल निशान सडन या किसी भी तरह के रोग के लक्षण दिखाई दें, उसे बीज के रूप में बिल्कुल नहीं लेना चाहिए. बीज के लिए 9 से 10 महीने पुराना स्वस्थ गन्ना सबसे अच्छा माना जाता है, इस उम्र के गन्ने में अंकुरण क्षमता बेहतर होती है, जिससे पौधों की संख्या अच्छी मिलती है और पैदावार भी बढती है. वही 11 से 12 महीने पुराना गन्ना लेने पर अंकुरण की संभावना काफी कम हो जाती है |
इस प्रकार गन्ना विभाग शक्कर कारखाना पंडरिया लगातार किसानों के खेतों में पहुंचकर किसानों को जागरूक कर रहा है


























































































































