प्रयागराज:- उत्तर प्रदेश की पावन नगरी प्रयागराज, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का पावन संगम होता है, वहां का कण-कण अध्यात्म और ऊर्जा से भरा है। हाल ही में लखनऊ प्रवास से लौटते समय, 12 मार्च 2026 को मुझे इस तीर्थराज की पावन धरा पर कदम रखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। संगम के तट पर स्थित ‘बड़े हनुमान जी’ (हनुमान गढ़ी) के दर्शन मात्र से हृदय में जो शांति और भक्ति का संचार हुआ, वह अवर्णनीय है।
माँ गंगा स्वयं करती हैं चरणों का अभिषेक
प्रयागराज का यह मंदिर विश्वभर में अपनी विलक्षणता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ बजरंगबली की विशाल प्रतिमा लेटी हुई मुद्रा में विराजमान है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रतिवर्ष वर्षा ऋतु के दौरान माँ गंगा स्वयं इस स्थान तक पहुँचती हैं। मान्यता है कि गंगा जी हनुमान जी के चरणों को स्पर्श करने के लिए ऊपर आती हैं और पूरा मंदिर जलमग्न हो जाता है। भक्तों के लिए यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं होता, जहाँ प्रकृति और परमात्मा का मिलन प्रत्यक्ष दिखाई देता है।
त्रेतायुग से जुड़ी है पौराणिक गाथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय के पश्चात जब हनुमान जी अत्यंत थक गए थे, तब भगवान श्रीराम के आदेश पर उन्होंने इसी स्थान पर विश्राम किया था। वे यहाँ शयन मुद्रा में विराजमान हो गए, और तभी से यह स्थान ‘लेटे हुए हनुमान जी’ के रूप में विख्यात हुआ। संगम में डुबकी लगाने के बाद इस विग्रह के दर्शन किए बिना तीर्थ यात्रा अधूरी मानी जाती है।
हनुमान जयंती पर विशेष संदेश
हनुमान जयंती (हनुमान जन्मोत्सव) के इस पावन पर्व पर, मंदिर परिसर ‘जय श्री राम’ और ‘जय बजरंगबली’ के उद्घोष से गुंजायमान है। संकटमोचन हनुमान जी की कृपा हम सभी पर बनी रहे। वे हमें जीवन की कठिन चुनौतियों से लड़ने के लिए शक्ति, बुद्धि और अदम्य साहस प्रदान करें।
इस पावन अवसर पर समस्त देशवासियों को हनुमान जयंती की अनंत शुभकामनाएँ। बजरंगबली आपकी सभी बाधाओं को दूर करें और आपके जीवन में सुख-समृद्धि का संचार करें।
🚩 जय श्री राम | जय बजरंगबली 🚩
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