रायपुर:- छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के ग्राम नकटी की जमीन को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर गहरा गया है। हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन अनुराग सिंहदेव के बयान के बाद अब पूर्व वन एवं परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर ने सरकार पर तीखा पलटवार करते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार और भाजपा नेता इस मामले में जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं तथा विरोधाभासी बयान देकर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाह रहे हैं।
प्रेस से चर्चा के दौरान मोहम्मद अकबर ने 4 अक्टूबर 2024 को आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव द्वारा संबंधित कलेक्टर को भेजे गए एक पत्र का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस पत्र में स्पष्ट रूप से ग्राम नकटी की 72 एकड़ भूमि खाली कराकर हाउसिंग बोर्ड को सौंपने का उल्लेख किया गया है, ताकि वहां सांसद-विधायक कॉलोनी विकसित की जा सके।
पूर्व मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या कोई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अपने विभागीय मंत्री की जानकारी और सहमति के बिना इतना महत्वपूर्ण पत्र जारी कर सकता है? उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसा होना संभव नहीं है। यदि पत्र जारी हुआ है तो निश्चित रूप से इसके पीछे सरकार की जानकारी और स्वीकृति रही होगी।
मोहम्मद अकबर ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता अब इस पूरे मामले से ध्यान भटकाने के लिए अलग-अलग बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले जमीन अधिग्रहण और कॉलोनी निर्माण को लेकर अलग बातें कही गईं, फिर बयान बदल दिए गए। इससे साफ प्रतीत होता है कि सरकार अपनी भूमिका को लेकर स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने सरकार को घेरते हुए एक और अहम सवाल उठाया कि ग्राम नकटी में बिना किसी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया के जमीन की तार फेंसिंग का कार्य आखिर किसके आदेश पर कराया जा रहा है? उन्होंने पूछा कि इस कार्य के लिए धनराशि किस मद से स्वीकृत हुई और किस विभाग ने इसकी अनुमति दी? यदि यह सरकारी कार्य है तो पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए, और यदि नहीं है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
पूर्व मंत्री ने कहा कि प्रदेश की जनता को इस पूरे मामले की सच्चाई जानने का अधिकार है। उन्होंने मांग की कि सरकार ग्राम नकटी की जमीन, हाउसिंग बोर्ड की भूमिका, 72 एकड़ भूमि के प्रस्ताव तथा फेंसिंग कार्य से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करे, ताकि किसी भी तरह की आशंका और भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
गौरतलब है कि ग्राम नकटी की जमीन को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर भाजपा इस मामले में कांग्रेस पर आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस सरकार से दस्तावेजों के आधार पर जवाब मांग रही है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्माने की संभावना है।


























































































































