कवर्धा:-प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत हालिया बजट को लेकर युवाओं, किसानों और आम जनता में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां एक ओर सरकार ने विकास और रोजगार के बड़े दावे किए हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने बजट को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस से जुड़े युवा नेताओं और विभिन्न संगठनों का कहना है कि इस बजट से युवाओं को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन रोजगार सृजन को लेकर कोई ठोस और स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया। बजट में बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराने की बात तो कही गई, लेकिन न तो नई भर्तियों की स्पष्ट घोषणा की गई और न ही पहले से लंबित भर्तियों को पूरा करने की कोई निश्चित समयसीमा बताई गई।

विशेष रूप से 56,000 शिक्षाकर्मियों की भर्ती का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से इस भर्ती का इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थियों में निराशा का माहौल है। युवाओं का कहना है कि बार-बार घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन उन्हें अमल में नहीं लाया जाता, जिससे उनके भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

बजट में महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई देने का आरोप लगाया जा रहा है। आम नागरिकों का मानना है कि बढ़ती महंगाई ने पहले ही लोगों की कमर तोड़ दी है, ऐसे में राहत के लिए ठोस कदमों की आवश्यकता थी, जो इस बजट में स्पष्ट रूप से नजर नहीं आए।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी नीति और समयबद्ध कार्ययोजना के साथ काम करना चाहिए। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, रोजगार के नए अवसर और शिक्षा व्यवस्था में सुधार अत्यंत आवश्यक है।
अंततः यह कहा जा सकता है कि इस बजट ने जहां कुछ वर्गों को आंशिक संतुष्टि दी है, वहीं युवाओं और आम जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा नहीं उतर सका है। अब सभी की निगाहें सरकार के आगामी कदमों पर टिकी हैं कि वह इन मुद्दों पर किस प्रकार ठोस कार्र
वाई करती है।







