पंडरिया ( पांडातराई):- कवर्धा जिले के पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम रोहरा और लड़ुवा के बीच बीते वर्ष 23 अक्टूबर 2025 को हुई खूनी रंजिश और जानलेवा हमले के मामले में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना को बीते 9 महीने से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन पीड़ित परिवार आज भी न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है, जबकि नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।

क्या था पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 23 अक्टूबर 2025 को अजय पटेल एवं उनके साथी रक्षाबंधन के दिन भाई दूज खाने जा रहे थे । रोहरा-लड़ुवा के बीच गांव के ही जगन्नाथ यादव, अजय पटेल और जयलाल पटेल पर लाठी और लोहे की रॉड से जानलेवा हमला किया गया था। इस हमले में अजय पटेल और उनके साथी लहूलुहान हो गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अजय पटेल के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई थीं और वे पूरी तरह खून से लथपथ हो गए थे। उन्हें अत्यंत गंभीर स्थिति में अस्पताल दाखिल कराया गया था।
रसूखदारों पर आरोप, कार्रवाई सिफर
इस मामले में पीड़ित पक्ष का सीधा आरोप है कि हमलावर कोई और नहीं बल्कि भाजपा के कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त व छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेसर पटेल के सगे संबंधी हैं। घटना में मुख्य आरोपी के रूप में विशेसर पटेल के सगे भाई कुलेंद्र पटेल उर्फ पुन्नी पटेल, उनके बेटे अजय गणेश पटेल उर्फ विक्की पटेल, शांतनु पटेल, श्रुति पटेल और खोरबरहिन पटेल का नाम सामने आया था। इन पांचों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।
पीड़ित पक्ष का दर्द और पुलिसिया सुस्ती
पीड़ितों का कहना है कि सत्ता पक्ष और ऊंचे राजनीतिक रसूख के दबाव में पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। घटना के 9 महीने बीत जाने के बाद भी किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। घायल अजय पटेल के परिजनों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा:
“आरोपी आज भी बेखौफ होकर गांव की गलियों में घूम रहे हैं। क्या सत्ता में बैठे लोगों के रिश्तेदारों के लिए कानून अलग है? अगर आम आदमी ऐसा करता तो अब तक जेल में होता।”
इस मामले में स्थानीय पुलिस प्रशासन की चुप्पी कई तरह के संदेह पैदा कर रही है। क्षेत्र की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिरकार पंडरिया पुलिस कब इन रसूखदार आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजेगी और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।







