कवर्धा:- आज के दौर में जहां जन्मदिवस का आयोजन प्रायः केक काटने, भव्य समारोह और उत्सव तक सीमित होकर रह गया है, वहीं समाजसेवी **तुषार चन्द्रवंशी** ने अपने जन्मदिवस को मानव सेवा और सामाजिक सरोकारों से जोड़कर एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने जन्मदिन के अवसर पर बैगा जनजाति बाहुल्य वनांचल क्षेत्रों के दूरस्थ गांवों में पहुंचकर जरूरतमंद बच्चों के बीच खुशियां बांटी और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास किया।

तुषार चन्द्रवंशी ने अपने सहयोगियों के साथ वनांचल क्षेत्र के बैगा समुदाय के गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां के बच्चों का मुंह मिठा कराकर जन्मदिवस की खुशियां उनके साथ साझा कीं। कई बच्चे ऐसे मिले जो आर्थिक अभाव के कारण नंगे पैर स्कूल आने-जाने को मजबूर थे। ऐसे बच्चों के पैरों में उन्होंने स्वयं चप्पल पहनाई और उन्हें बेहतर भविष्य के लिए आगे बढ़ने का हौसला दिया।
शिक्षा के महत्व को समझते हुए तुषार चन्द्रवंशी ने स्कूली बच्चों को कापियां, स्कूल बैग तथा अन्य अध्ययन सामग्री भी वितरित की। सामग्री पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे और उनकी खुशी देखते ही बन रही थी। ग्रामीणों ने भी इस पहल की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि जन्मदिवस मनाने का यह तरीका समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश देता है।
इस अवसर पर तुषार चन्द्रवंशी ने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े जरूरतमंद लोगों तक पहुंचकर उनकी छोटी-छोटी आवश्यकताओं को पूरा करना ही सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने जीवन के विशेष अवसरों को समाजहित के कार्यों से जोड़ दें, तो इससे अनेक जरूरतमंद लोगों के जीवन में खुशियां लाई जा सकती हैं।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ और अन्य पारिवारिक आयोजनों को केवल व्यक्तिगत उत्सव तक सीमित न रखते हुए समाजसेवा के कार्यों से भी जोड़ना चाहिए, ताकि जरूरतमंदों की मदद हो सके और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ावा मिले।
तुषार चन्द्रवंशी की इस मानवीय पहल ने न केवल बैगा वनांचल के बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि वास्तविक खुशी दूसरों के जीवन में खुशियां बांटने और सेवा भाव से कार्य करने में ही निहित है। उनकी इस पहल की क्षेत्रभर में सराहना की जा रही है तथा लोग इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायी कदम बता रहे हैं।






