पंडरिया :- ग्राम पंचायत दशरंगपुर में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिजली बिल में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन घरों में पहले हर महीने करीब 300 से 400 रुपये का बिजली बिल आता था, उन्हीं उपभोक्ताओं को अब हजारों रुपये की राशि की पर्चियां दी जा रही हैं। कुछ उपभोक्ताओं को 8 हजार रुपये से लेकर 61 हजार रुपये से अधिक तक की राशि बताई गई है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है और वे बिजली बिलों की जांच कराकर सुधार की मांग कर रहे हैं।


ग्रामीणों के अनुसार, पहले बिजली मीटर की रीडिंग नियमित रूप से दर्ज की जाती थी और उसी के आधार पर बिल का भुगतान किया जाता था। लेकिन स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद पुरानी खपत भी एक साथ बिलिंग में जुड़ने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि वास्तविक मासिक खपत के अनुरूप बिल जारी होने के बजाय अचानक बड़ी राशि सामने आने लगी है।
सादे कागज पर थमाई जा रही बिल की पर्ची
इस पूरे मामले में एक और गंभीर सवाल बिजली बिल देने की प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें बिजली कंपनी की ओर से जारी प्रिंटेड बिल देने के बजाय मीटर रीडरों द्वारा सादे कागज पर बीपी नंबर और राशि लिखकर पर्ची थमा दी गई।
ग्रामीणों द्वारा इस संबंध में शिकायत किए जाने पर इंदौरी बिजली सब-स्टेशन के जेई तिलेश्वर नेताम ने भी सादे कागज पर बीपी नंबर और राशि लिखकर बिल देने की प्रक्रिया को गलत बताया है। ऐसे में ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से पूरे मामले की जांच और बिलिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की है।
10 हजार उपभोक्ताओं की रीडिंग के लिए केवल 6 कर्मचारी
इंदौरी सब-स्टेशन के अंतर्गत करीब 25 गांव आते हैं और यहां लगभग 10 हजार बिजली उपभोक्ता बताए जा रहे हैं। इन उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग के लिए ठेका एजेंसी के केवल छह कर्मचारी काम कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े क्षेत्र और हजारों उपभोक्ताओं के बीच सीमित कर्मचारियों के कारण मीटर रीडिंग और बिलिंग व्यवस्था में गड़बड़ी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों ने मांग की है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने से पहले और उसके बाद की मीटर रीडिंग का मिलान किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अचानक बढ़ी हुई राशि किस आधार पर बिल में दिखाई गई है।
80 से अधिक परिवारों ने जताई शिकायत
दशरंगपुर में 80 से अधिक उपभोक्ताओं के सामने बिजली बिल बढ़ने की समस्या आने की बात सामने आई है। परेशान ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मणिकांत त्रिपाठी, युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी, जिला उपाध्यक्ष भीषम पांडेय, शैलेंद्र केशरी, भोलाराम चंद्रवंशी, राजू खान और महेश केशरी ग्रामीणों के साथ बिजली कार्यालय पहुंचे।
ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने सादे कागज पर दी गई पर्चियां प्रस्तुत करते हुए बिलों की जांच और सुधार की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि उपभोक्ताओं की समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
सुरेश चंद्राकर को 61,726 रुपये की पर्ची
दशरंगपुर निवासी सुरेश चंद्राकर का बीपी नंबर 1002656186 के आधार पर 61,726 रुपये की राशि की पर्ची दी गई। उनका कहना है कि वे अब तक नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करते आए हैं। ऐसे में अचानक इतनी बड़ी राशि सामने आने से वे हैरान हैं।
इसी तरह रामजी सिन्हा (बीपी नंबर 1002656183) को 8,716 रुपये और परमा साहू (बीपी नंबर 1007397318) को 14,214 रुपये की राशि की पर्ची दिए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि उनके लिए आर्थिक परेशानी का कारण बन गई है।
पुरानी खपत एक साथ जुड़ने की आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूर्व में मीटर की रीडिंग सही तरीके से दर्ज नहीं हुई और बाद में स्मार्ट मीटर के माध्यम से वास्तविक खपत सामने आई, तो पिछली खपत एक साथ बिल में जुड़ सकती है। इसी संभावना को लेकर उपभोक्ता अपने पुराने बिल और वर्तमान मीटर रीडिंग का मिलान कराने की मांग कर रहे हैं।
बिजली खपत की यूनिट बढ़ने का असर उपभोक्ताओं को मिलने वाली छूट पर भी पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता की मासिक खपत सामान्य सीमा के भीतर रही हो, लेकिन पिछली रीडिंग का अंतर बाद में एक साथ जोड़ दिया जाए, तो बिल में अचानक अधिक यूनिट दिखाई दे सकती हैं और इससे उपभोक्ता की देय राशि बढ़ सकती है।
### ग्रामीणों की मांग—पुरानी और नई रीडिंग का हो मिलान
दशरंगपुर के ग्रामीणों ने बिजली विभाग से मांग की है कि प्रत्येक शिकायतकर्ता के पुराने मीटर की अंतिम रीडिंग, स्मार्ट मीटर की शुरुआती रीडिंग और वर्तमान रीडिंग का रिकॉर्ड सामने रखा जाए। साथ ही जिन उपभोक्ताओं को बड़ी राशि की पर्चियां दी गई हैं, उनके बिलों की दोबारा जांच कर वास्तविक खपत के आधार पर संशोधित बिल जारी किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बिलिंग की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक अचानक हजारों रुपये की राशि वसूलना उचित नहीं होगा। वहीं विभागीय स्तर पर जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बढ़ी हुई राशि का कारण मीटर रीडिंग, पुरानी खपत का समायोजन, बिलिंग प्रक्रिया या कोई अन्य तकनीकी वजह है।
अब नजर बिजली विभाग की जांच पर है कि दशरंगपुर के उपभोक्ताओं के बढ़े हुए बिलों की वास्तविक वजह क्या है
और शिकायतों का समाधान कब तक किया जाता है।

























































































































