कवर्धा:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर भाजपा द्वारा।17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में भी अभियान के तहत जनसेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़ी गतिविधियां आयोजित किए जाने की बात कही गई है।



लेकिन इसी बीच कवर्धा-कबीरधाम जिले की सड़कों पर घूमते आवारा मवेशी ‘सेवा’ के दावों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करते नजर आ रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण मार्गों तक सड़क पर बैठे और घूमते मवेशियों के कारण वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। वहीं, हादसों में मवेशियों के घायल होने और मौत की घटनाएं भी सामने आने की बात स्थानीय लोगों ने कही है।
सेवा का संकल्प… लेकिन सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा!
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पूरे प्रदेश में सेवा और जनकल्याण को लेकर अभियान चलाया जा रहा है, तो सड़कों पर खुलेआम घूम रहे इन मवेशियों की सुध आखिर कौन लेगा?
कवर्धा-कबीरधाम को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा का गृह जिला माना जाता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर आवारा मवेशियों की समस्या को लेकर प्रशासन और नगरीय निकाय की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सड़कों पर बैठे मवेशी, तेज रफ्तार वाहन और अचानक सामने आने वाला पशु—यह पूरा समीकरण किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
भागूटोला रोड पर मवेशी का सड़कों पर जमावड़ा से मची अफरा-तफरी
स्थानीय जानकारी के अनुसार भागूटोला रोड में ही मवेशियों कर सड़क में ही जमावड़ा होने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ और जाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई।
यह घटना सिर्फ मवेशियों की सुरक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि सड़क पर चलने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा से भी सीधे जुड़ी हुई है।
किसानों की फसल भी हो रही प्रभावित
आवारा मवेशियों की समस्या का असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में खुले घूमने वाले मवेशियों के खेतों में पहुंचने से किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की शिकायतें भी सामने आती रहती हैं।
किसानों का कहना है कि एक ओर खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर यदि फसल आवारा मवेशियों की वजह से बर्बाद हो जाए तो किसान की मेहनत और आर्थिक नुकसान दोनों बढ़ जाते हैं।
जिम्मेदारों से सीधा सवाल—कब बनेगी ठोस व्यवस्था?
अब सवाल यह है कि जब ‘सेवा संकल्प अभियान’ का उद्देश्य जनसेवा और जनभागीदारी को बढ़ावा देना है, तो क्या सड़कों पर बेसहारा घूम रहे मवेशियों की सुरक्षा भी इस सेवा के दायरे में नहीं आनी चाहिए?
जरूरत है कि संबंधित प्रशासन और नगरीय निकाय आवारा मवेशियों के लिए प्रभावी व्यवस्था, सुरक्षित आश्रय, सड़क से हटाने की नियमित कार्रवाई और दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर ठोस कदम उठाएं।
क्योंकि दीप जलाने और सेवा का संकल्प लेने से आगे बढ़कर सेवा तब दिखाई देगी, जब सड़कों पर इंसान और बेजुबान दोनों सुरक्षित नजर आएं।


























































































































