कवर्धा:- छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव जी की सरकार ने गन्ना किसानों के साथ बोनस के नाम पर अन्याय और भेदभाव की नई मिसाल पेश की है। प्रदेश के कृषि मंत्री #रामविचार नेताम जी के नेतृत्व में गन्ना किसानों को जिले और क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग बोनस देने का निर्णय आखिर किस तर्क और न्याय के आधार पर लिया गया है?
एक ही प्रदेश, एक ही फसल और एक ही मेहनत करने वाले किसानों के लिए अलग-अलग बोनस क्यों? सरगुजा संभाग के किसानों को 96 रुपये प्रति क्विंटल और कबीरधाम जिले के गन्ना किसानों को मात्र 70 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देना किसानों के साथ खुला अन्याय है।
सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि कबीरधाम के गन्ना किसानों ने बेहतर शुगर रिकवरी के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का मान-सम्मान बढ़ाया है, इसके बावजूद उन्हें कम बोनस दिया जा रहा है। वर्षों से प्रदेश के चारों शक्कर कारखानों के किसानों को 9.5 प्रतिशत बेसिक शुगर रिकवरी के आधार पर समान बोनस मिलता रहा है, लेकिन इस बार नियमों की आड़ में किसानों के बीच भेदभाव की दीवार खड़ी कर दी गई है।
यह फैसला केवल कृषि मंत्री रामविचार नेताम का नहीं, बल्कि पूरी साय सरकार की जवाबदेही का विषय है।
उपमुख्यमंत्री #विजय शर्मा जी, जो किसानों की आवाज और गरीबों के हितैषी होने की बात करते हैं, उन्हें भी बताना चाहिए कि कबीरधाम के गन्ना किसानों के साथ हो रहे इस अन्याय पर उनकी चुप्पी क्यों है?
हमारी मांग स्पष्ट है—प्रदेश के सभी गन्ना किसानों को समान बोनस दिया जाए। किसानों को आपस में बांटने की राजनीति बंद हो और पूर्व वर्षों की तरह सभी शक्कर कारखानों के किसानों के साथ समान न्याय किया जाए।
भाजपा सरकार को समझना होगा कि किसान केवल चुनाव के समय याद आने वाला वोट बैंक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। किसानों की मेहनत और अधिकारों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कबीरधाम के #किसानों की आवाज बुलंद होगी, अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा!
किसानों के साथ भेदभाव बंद करो, सभी गन्ना किसानों को समान बोनस दो!




















































































































