कवर्धा:- देश के गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे देश में नशे के खिलाफ अभियान चलाने और नशे के खात्मे का ऐलान किया है। इसी कड़ी में वे 20 अक्टूबर को पंजाब भी पहुंचे और नशे के खिलाफ आवाज उठाने पर मारे गए लोगों के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही। गृह मंत्री की इस पहल को सराहनीय बताते हुए कवर्धा कृषि उपज मंडी के पूर्व उपाध्यक्ष चोवाराम साहू ने सवाल उठाया कि क्या यह अभियान केवल गैर-भाजपा शासित राज्य पंजाब तक ही सीमित रहेगा? श्री साहू ने जारी बयान में कहा कि भाजपा शासित छत्तीसगढ़ राज्य में स्वयं भाजपा सरकार शराब बेचकर हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त कर रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश को शराब कारोबार से करीब 10,751 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व मिला है। यानी औसतन प्रतिमाह लगभग 896 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इस आंकड़े को देखकर अंदाजा लगाना कठिन नहीं है कि प्रदेश में शराब की खपत कितनी बड़ी मात्रा में हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में शराबखोरी के कारण अनेक परिवार प्रभावित हो रहे हैं। शराब के चलते हत्या, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा सहित गंभीर अपराधों और सड़क हादसों की समस्या भी चिंता का विषय बन चुकी है। वहीं, अवैध शराब की उपलब्धता और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से युवा पीढ़ी पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। श्री साहू ने सवाल किया कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में नशे का खात्मा चाहती है, तो क्या गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ में भी पूर्ण शराबबंदी के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार को निर्देश देंगे? उन्होंने कहा कि नशामुक्ति की पहल तभी सार्थक होगी, जब इसे सभी राज्यों में समान रूप से लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई देगी। ऐसा न हो की जिस गैर भाजपा शासित राज्य में चुनाव हो नशा मुक्ति का राग सिर्फ उसी राज्य में अलापा जाए।

























































































































