तरेगांव (कवर्धा):- वन विभाग के तरेगांव जंगल परिक्षेत्र में दशकों से अपनी सेवा समर्पित कर चुके मुन्ना यादव को सेवानिवृत्ति पर शनिवार को एक भावभीनी विदाई दी गई। तरेगांव जंगल निरीक्षण कुटीर में आयोजित इस कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, पूर्व सहयोगी और क्षेत्रीय कर्मचारी संघ के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सेवा से सराबोर जीवन
मुन्ना यादव ने अपने जीवन के बचपन से लेकर सेवानिवृत्ति तक तरेगांव वन परिक्षेत्र में बिताया। उन्हें केवल एक कर्मचारी के रूप में नहीं, बल्कि एक संरक्षक, एक सेवक और एक प्रहरी के रूप में जाना जाता है।

सेवानिवृत्त हो चुके कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों ने बताया कि यादव की भोजन बनाने की कला विशेष थी, लेकिन उनकी असली पहचान उनके कर्तव्यनिष्ठ और सतत सेवा भाव से थी।
होली, दीपावली जैसे त्योहारों पर जब सभी कर्मचारी अवकाश पर होते थे, तब भी रेस्ट हाउस की सुरक्षा की जिम्मेदारी उन्होंने खुद के कंधों पर उठाई। उन्होंने कभी रविवार की छुट्टी नहीं ली, और 24×7 हमेशा तैनात रहते।
कर्तव्य पहले, परिवार बाद में
यादव ने स्वयं कहा:
“मेरे लिए नौकरी सिर्फ आजीविका का साधन नहीं थी, यह मेरा जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका था।
सर्वप्रथम कार्य, उसके बाद परिवार।”
उनका यह भाव दर्शाता है कि कैसे उन्होंने कर्तव्य को अपने जीवन का सर्वोच्च धर्म माना। उनकी उपस्थिति हमेशा कर्मचारियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत रही।
कार्यक्रम में भावनात्मक क्षण
विदाई समारोह का आयोजन एक सादगीपूर्ण और भावनात्मक वातावरण में हुआ।
कार्यक्रम की अगुवाई वन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष श्री परस राम चंद्रकार ने की। उन्होंने कहा:
“कर्मचारी आएंगे और जाएंगे,
परंतु मुन्ना यादव जी जैसा समर्पण और सादगी विरले ही देखने को मिलती है।
उनका जीवन और सेवा आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है।”
नियम है, पर भावना भी है
यादव जैसे कर्मचारियों के लिए सभी की यही भावना रही कि जब तक वे स्वस्थ हैं, सेवा में बने रहना चाहिए था, लेकिन शासन के सेवा-निवृत्ति के निर्धारित नियमों के तहत उन्हें यह पड़ाव स्वीकार करना पड़ा। उज्ज्वल भविष्य की कामना
कार्यक्रम के समापन पर श यादव को सम्मान-पत्र, स्मृति चिह्न एवं शुभकामनाएं भेंट की गईं। सभी सहकर्मियों ने एक स्वर में उनके स्वस्थ, दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना की।
मुन्ना यादव भले ही आज सेवानिवृत्त हो गए हों, लेकिन तरेगांव वन परिक्षेत्र की मिट्टी, हवा और वृक्षों में उनका संवेदनशील स्पर्श हमेशा जीवित रहेगा।







