रायपुर:-चैतन्य बघेल के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को प्रदेशव्यापी आर्थिक नाकेबंदी कर विरोध जताया। इस प्रदर्शन के माध्यम से कांग्रेस ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया।
वहीं, कांग्रेस के इस कदम पर राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जुड़े निर्णयों को लेकर पांच बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस से स्पष्ट जवाब मांगा है।
वित्त मंत्री ने पूछा:

- क्या भूपेश बघेल के शासनकाल में 16 अक्टूबर 2019 को गारे पेलमा कोयला खदान से जुड़ी जनसुनवाई नहीं कराई गई थी?
- क्या 31 मार्च 2021 को गारे पेलमा सेक्टर-2 को लेकर पर्यावरणीय स्वीकृति की सिफारिश कांग्रेस सरकार द्वारा नहीं की गई थी?
- क्या 19 अप्रैल 2022 को स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस की सिफारिश कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नहीं हुई थी?
- यदि ये सभी निर्णय कांग्रेस शासनकाल में लिए गए थे, तो अब जब कानूनी एजेंसियां जांच कर रही हैं, तो विरोध का क्या औचित्य है?
- क्या कांग्रेस खुद अपने शासनकाल में लिए गए फैसलों पर भरोसा नहीं करती?
ओपी चौधरी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब जनता को भ्रमित करने और जांच एजेंसियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि “कानून अपना काम करेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
कांग्रेस नेताओं ने, दूसरी ओर, इसे एक राजनीतिक साजिश बताया है और कहा कि चैतन्य बघेल को भूपेश बघेल का रिश्तेदार होने के चलते निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार से बौखलाई भाजपा की प्रतिक्रिया है।







