मुकेश झा (बालोद) भवानीपुर:- क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में अवैध शराब की बिक्री दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। भरुवाडीह, बिजराडीह, गिधपुरी, जुनवानी, वटगन, तेरासी जैसे अनेक गांवों में देशी, विदेशी और महुआ शराब की खुलेआम बिक्री हो रही है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि अब छोटे-छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी नशे की लत का शिकार हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध शराब के इस बढ़ते कारोबार ने गांवों के सामाजिक ताने-बाने को बुरी तरह प्रभावित किया है। खासकर युवा वर्ग तेजी से इस नशे के जाल में फंस रहा है। शाम होते ही गांव की सड़कों, खेतों और गली-मोहल्लों में नशेड़ियों का जमावड़ा लग जाता है। इससे न केवल सामाजिक वातावरण बिगड़ रहा है, बल्कि असुरक्षा की भावना भी लोगों में घर कर रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार आबकारी विभाग से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। कभी-कभार खानापूर्ति के नाम पर कार्रवाई होती है, मगर दो-तीन दिन बाद हालात फिर जस के तस हो जाते हैं। कई बार तो शिकायत करने वालों को ही डराया-धमकाया जाता है, जिससे गांव में तनाव की स्थिति बन जाती है।
कॉलेज विद्यार्थियों में भी डर का माहौल
वटगन कॉलेज के आसपास की स्थिति भी अत्यंत चिंताजनक है। कॉलेज आने-जाने वाले छात्र-छात्राएं नशेड़ियों की गतिविधियों से डरे-सहमे रहते हैं। छात्राओं के अभिभावकों को हर समय चिंता सताती है कि कहीं कोई अप्रिय घटना न हो जाए।
घरों में भी कलह का माहौल
शराब सेवन के कारण कई घरों में आए दिन विवाद की स्थिति बनी रहती है। नशे में धुत व्यक्ति घर लौटते ही झगड़े-फसाद शुरू कर देता है, जिससे पारिवारिक शांति भंग हो रही है। इसका सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ रहा है, जिनका मानसिक विकास अवरुद्ध हो रहा है।
जनप्रतिनिधि और प्रशासन की भूमिका संदिग्ध
ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे इस मुद्दे को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचाते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों को पहले ही सूचना मिल जाती है और वे कार्रवाई से बच निकलते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि कहीं न कहीं विभागीय मिलीभगत भी इस अवैध कारोबार को संरक्षण दे रही है।
ग्रामीणों की मांग: हो स्थायी समाधान
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में चल रहे अवैध शराब के कारोबार पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, आबकारी विभाग की निष्क्रियता की भी जांच हो, ताकि ऐसे मामलों में लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय की जा सके।







